कम लालच, स्थायी लाभ: गीता और सस्टेनेबल बिजनेस भूमिका आज के समय में बिजनेस का मतलब अक्सर ज्यादा मुनाफा, जल्दी मुनाफा समझ लिया गया है। इसी सोच के कारण पर्यावरण प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन और सामाजिक असंतुलन बढ़ रहा है। लेकिन श्रीमद्भगवद्गीता हमें सिखाती है कि असंतुलित लालच अंततः विनाश की ओर ले जाता है, जबकि संयम और संतुलन से किया गया कर्म दीर्घकालिक सफलता देता है। आज का सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल इसी गीता दर्शन से मेल खाता है। गीता का मूल संदेश: लालच नहीं, संतुलन गीता में भगवान श्रीकृष्ण कर्म को त्याग नहीं, बल्कि आसक्ति के त्याग की बात करते हैं। “युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु।” (गीता 6.17 का भावार्थ) जो व्यक्ति आहार, विहार और कर्म में संतुलन रखता है, वही स्थायी सुख प्राप्त करता है। 👉 यही सिद्धांत बिजनेस पर भी लागू होता है। असीम लालच = अल्पकालिक लाभ + दीर्घकालिक नुकसान संतुलन = स्थायी मुनाफा + समाज का कल्याण सस्टेनेबल बिजनेस क्या होता है? सस्टेनेबल बिजनेस वह होता है जो: 🌱 पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाए 👥 समाज के हित को ध्यान में रखे 💰 लंबे समय तक स्थिर मुनाफा दे...
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